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  • Visit in Banglore

    I am in Jaipur, Rajsthan for an Vastu Visit @ 26 June 2016. Interested person can meet me in Jaipur. Book your appointment @ +91 8010381364 / 8468055552.
  • Visit in Meerut

    I am in Meerut, UP for an Vastu Visit @ 29 June 2016. Interested person can meet me in Meerut. Book your appointment @ +91 8010381364 / 8468055552.
  • Visit in Moradabad

    I am in Moradabad, UP for an Vastu Visit @ 15 July 2016. Interested person can meet me in Moradabad. Book your appointment @ +91 8010381364 / 8468055552.
  • Visit in Bareilly

    I am in Bareilly, UP for an Vastu Visit @ 16 July 2016. Interested person can meet me in Moradabad. Book your appointment @ +91 8010381364 / 8468055552.
  • Visit in Shahjahanpur

    I am in Shahjahanpur, UP for an Vastu Visit @ 17 July 2016. Interested person can meet me in Moradabad. Book your appointment @ +91 8010381364 / 8468055552.
  • Visit in Lucknow

    I am in Lucknow, UP for an Vastu Visit @ 20 July 2016. Interested person can meet me in Moradabad. Book your appointment @ +91 8010381364 / 8468055552.
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About VastuRemedy

vastuadviser.com is a center for the solution of Vastu and Astrological issues. Here we consult you with our best services. Our aim is to serve you genuinly without creating any confusion. Here Anyone can get the remedies for his Vastu and Astrology related problems. We trust for your well being and then provides you remedies for all of your problems at a very genuine plateform. We have been felicitated several times for our outstanding knowledge on Vastu and Astrology.

Financial stringency, Unemployment, Disase, Litigation, Marriage/Divorce, Strained husband / wife relationship, Mental disturbance, Accidents, Fire/Theft incidents, Harassment to son / daughter from in-law's side etc. can be rectified by adopting the solutions of Vastu. You can send your building map at remedyvastu@gmail.com , It is must to mark accurate directions in your map. If the building is constructed according to Vastu principles, then all the problems be solve automatically. By the blessing of God, by studying the vastu of a House / Bedroom, one can predict the trend and events of the residence there. If, the house/bedroom are in accordance with vastu principles the life of the residence will be in tune with nature. This is the law of Nature.

वास्तु का स्वरूप
भगवान अर्ध–नारीश्वर (जिनके शरीर का दायाँ आधा भाग पुरूष व बायाँ आधा भाग नारी है) के चरण ही वास्तु का स्वरूप हैं। दाएँ चरण का अगला भाग (अँगूठा और उंगलियाँ) पूर्व और पिछला भाग (एँड़ी) पश्चिम, पुरूषों का स्थान होता है। बाएँ चरण का अगला भाग (अँगूठा और उंगलियाँ) उत्तर और पिछला भाग (एँड़ी) दक्षिण, महिलाओं का स्थान होता है। भगवान के दाएँ और बाँए चरणों के अँगूठों के नाखूनों से गंगा जी प्रकट हुईं हैं।

शास्त्रों व समाज की मान्यता है कि ईश्वर की ईच्छा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। परमात्मा हर प्राणी के अंदर बसते हैं। और सारा ब्रह्माण्ड उनके अंदर है। परमात्मा की कृपा से ही जीव (पेंड़–पौधे, पशु–पक्षी इत्यादि) चेतन होते हैं। वास्तु विद्या भी प्रभू की उसी कृपा के दर्शन कराती है। जो परिवार जिस तरह के कर्म करता है उसे उसी तरह के वास्तु का भवन/स्थान मिलता है। इस विद्या का ज्ञान होने पर भी, वास्तु दोष दिखाई नहीं देते। वास्तु तभी ठीक होगा जब प्रभू की कृपा होगी। हमारे जीवन में सुख का अर्थ आनन्द, दुख का अर्थ तप, यानि परम आध्यात्म, जो जन्म–जन्म तक जीव के साथ रहता है। हम दस दिशाओं व उनके दिग्पालों की पूजा करते हैं, विशेषकर शक्ति स्वरूप माता भगवती से हम दस दिशाओं का रक्षा कवच पाने की प्रार्थना करते हैं। जो परिवार ईश्वर के पूर्ण भक्त हैं, उन परिवारों को विशेष रूप से वास्तु रूपी ईश्वर की कृपा का कवच मिलता है और राजा जनक जैसी स्थिति प्राप्त होती है।

दिशाओं का परिचय :–

दस दिशाएं 1. पूर्व, 2. दक्षिण, 3. पश्चिम, 4. उत्तर, 5. साउथ–वेस्ट (नैरूति), 6. साउथ–ईस्ट (आग्नेय), 7. नार्थ–वेस्ट (वायव्य), 8. नार्थ–ईस्ट (ईशान), 9. भूमि, 10. आकाश हैं।

प्लॉट के फेसिंग का महत्व :–

प्लॉट पूर्व / उत्तर / दक्षिण / पश्चिम / नार्थ–ईस्ट / साउथ–ईस्ट/साउथ–वेस्ट/नार्थ–वेस्ट सभी दिशाओं का शुभ होता है और प्रत्येक दिशा का अपना विशेष महत्व है। वास्तु के अनुसार सही तरह से निर्माण करने पर उसके पूर्ण लाभ मिलते हैं।

प्रकृति/वास्तु द्वारा निर्धारित नियम :–

जिस प्रकार ग्रहों का घूमना, मौसम का बदलना इत्यादि प्रकृति के नियम हैं। इसी प्रकार वास्तु सिद्वान्त भी प्राकृतिक नियम हैं।